Kanti Se KantiKartik ( singer ) Banne Ka Safar

KANTIKARTIK YADAV

कांति से कान्तिकार्तिक ( सिंगर ) बनने का सफर

( यूट्यूब पर 60 लाख से अधिक व्यूज़ छ,ग के स्रोताओं की रुचि को दर्शाता है )

कान्तिकार्तिक का जन्म छ ग के राजनांदगांव जिले के छोटे से गांव माथलड़बरी में 26 जनवरी 1991 के दिन हुआ | माता पिता शिक्षक दम्पति है एवम साथ ही एक अच्छे कलाकार भी है अतः लोककला लोक संस्कृति भावना इसी महौल में प्राप्त हुई । चर्चा में कान्तिकार्तिक ने बताया कि स्कूल के दिनों में विविध स्पर्द्धाओं में भाग लेकर एवम माता पिता व गुरुजनो के प्रेरणा स्वरूप गायन व लेखन में रुचि बनी रही। कालेज के दिनों में रास्ट्रीय सेवा योजना से जुड़कर रास्ट्रीय एवम अंतरास्ट्रीय स्तर के शिविरों में शामिल हुए एवम उन बड़े मंचो में अन्य राज्यो के कलाकारों को अपने राज्य की लोककला का प्रदर्शन करते देख कर स्वयं भी छत्तीसगढ़ की कला को बिखेरु यह भावना प्रगढ़ होती गई। जिसके फल चीन में देश व राज्य का प्रतिनिधित्व कर प्राप्त हुआ ।कान्तिकार्तिक को 2013 में राष्ट्रीय सेवा योजना के अंतर्गत राषटीय पुरसकार प्राप्त हुआ ।

KANTIKARTIK YADAV

उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर कान्तिकार्तिक अब तक तीन बार देश के भिन्न भिन्न तत्कालीन महमहिम् राष्टपति से मुलाकात कर चुके है । कान्तिकार्तिक ने बताया कि ये सभी सौभाग्य पुरद उपलब्धियां मन मे प्रेरणा उत्पन्न करती है कि एक कलाकार के रूप में मैं अपने छत्तीसगढ़वाशियों को उन गीतों का उपहार अवश्य दूं। जिसमे हमारी माटी की भीनी भीनी मीठी खुसबू आती है । मित्र ओमप्रकाश देवांगन के साथ मिलकर ” कब होही तोर दरसन मैया ” का रिप्रेज वर्जन प्रस्तुत किया जिसे राज्य के स्रोताओं में काफी सराहा ,इसके बाद ” नौ दिन बर आये वो ” , जोरव जोरन ” ” दाई तोर आँखि ले बरसे पानी ” , ” CHAIHA – भुइया ” जैसे गीतों को cg व अन्य राज्यो के स्रोताओं ने खूब सराहा । आगे कान्तिकार्तिक ने बताया कि रायपुर निवासी श्री तीरथ यादव ( चाचा जी ) ने मेरी कला को परखते हुए , बड़े स्तर पर एलबम के माध्यम से लोगो तक अपनी आवाज पहुचाने की बात कही एवम एक अच्छे मार्गदर्शन के रूप में लगातार मार्गदर्शन कर रहे है । ” तै छाये दाई वो ” एलबम तीरथ यादव जी द्वारा ही लिखा गया है , जिसमे बिदाई गीत ” तीजा बरोबर आये वो दाई ” के गीतकार कान्तिकार्तिक है । k o k क्रिएशन तीन मित्रो कान्तिकार्तिक ,ओपी देवांगन व केदार यादव द्वारा बनाया गया है व टीम में सहा. संगीतकार के रूप में युगल तिरथ यादव एवं देवव्रत यादव अपना योगदान दे रहे है ।

KANTIKARTIK YADAV

गणेश चतुर्थी हेतु गीतों का नजराना व आगामी एलबम ” माँ पाताल भैरवी ” और देवी जीवरानी ” जल्द ही स्रोताओं को सुनने मिलेगा । अंत मे कान्तिकार्तिक ने कहा कि हम आगे भी अपनी संस्कृति व भाषा को अपने गीतों के माध्यम से बढावा देते हुए राज्य के युवाओं में अपनी संस्कृति पर गर्व का भाव पैदा करते रहेंगे।

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